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श्लोक 4.67.10  |
तस्याहं शीघ्रवेगस्य शीघ्रगस्य महात्मन:।
मारुतस्यौरस: पुत्र: प्लवनेनास्मि तत्सम:॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| मैं उस महान् वेगवान वायु का स्वाभाविक पुत्र हूँ जो अत्यन्त वेग से चलता है और छलांग लगाने में उसके समान हूँ॥10॥ |
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| I am the natural son of the swift and great Vayu who moves with great speed and I am equal to him in leaping.॥ 10॥ |
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