श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 8-10h
 
 
श्लोक  4.66.8-10h 
अप्सराऽप्सरसां श्रेष्ठा विख्याता पुञ्जिकस्थला।
अञ्जनेति परिख्याता पत्नी केसरिणो हरे:॥ ८॥
विख्याता त्रिषु लोकेषु रूपेणाप्रतिमा भुवि।
अभिशापादभूत् तात कपित्वे कामरूपिणी॥ ९॥
दुहिता वानरेन्द्रस्य कुञ्जरस्य महात्मन:।
 
 
अनुवाद
(वीरवर! आपके जन्म की कथा इस प्रकार है-) पुंजिकस्थला नाम की अप्सरा समस्त अप्सराओं में श्रेष्ठ है। हे प्रिये! एक बार शापवश उसने वानर योनि में जन्म लिया था। उस समय वह महामनस्वी वानरराज कुंजर की पुत्री थी और इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकती थी। इस पृथ्वी पर उसके सौन्दर्य के समान कोई अन्य स्त्री नहीं थी। वह तीनों लोकों में विख्यात थी। उसका नाम अंजना था। वह वानरराज केसरी की पत्नी बनी। 8-9 1/2।
 
(Viraavar! The story of your birth is as follows-) The Apsara known as Punjikasthala is the foremost among all the Apsaras. O dear! Once due to a curse she was born in a monkey's body. At that time she was the daughter of the great-minded monkey king Kunjar and could assume any form as per her wish. There was no other woman on this earth who could match her beauty. She was famous in all the three worlds. Her name was Anjana. She became the wife of monkey king Kesari. 8-9 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)