श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.66.7 
बलं बुद्धिश्च तेजश्च सत्त्वं च हरिपुङ्गव।
विशिष्टं सर्वभूतेषु किमात्मानं न सज्जसे॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे वानरों के सरदार! आपका बल, बुद्धि, तेज और धैर्य सभी प्राणियों में श्रेष्ठ है। फिर आप समुद्र पार करने के लिए तैयार क्यों नहीं होते?॥7॥
 
O head of monkeys! Your strength, intelligence, brilliance and patience are the best among all creatures. Then why don't you prepare yourself to cross the ocean?॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)