श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  4.66.36 
उत्तिष्ठ हरिशार्दूल लङ्घयस्व महार्णवम्।
परा हि सर्वभूतानां हनुमन् या गतिस्तव॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ हनुमान! उठो और इस सागर को पार करो, क्योंकि तुम्हारी गति समस्त प्राणियों से अधिक है।
 
O best of the monkeys, Hanuman! Arise and cross this ocean, for your speed is greater than that of all creatures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)