श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.66.24 
तदा शैलाग्रशिखरे वामो हनुरभज्यत।
ततो हि नामधेयं ते हनुमानिति कीर्तितम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उस समय उदयगिरि की चोटी पर वज्र के प्रहार से आपकी ठोड़ी का बायाँ भाग टूट गया था। तभी से आपका नाम हनुमान पड़ा।
 
‘At that time, on the peak of Udayagiri, the left side of your chin was broken by a blow of thunderbolt. From then on, you were named Hanuman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)