श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.66.21 
अभ्युत्थितं तत: सूर्यं बालो दृष्ट्वा महावने।
फलं चेति जिघृक्षुस्त्वमुत्प्लुत्याभ्युत्पतो दिवम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जब तुम बालक थे, तब एक दिन तुमने एक विशाल वन में उगते हुए सूर्य को देखा और सोचा कि यह कोई फल है; अतः तुम उसे लेने के लिए सहसा आकाश में कूद पड़े॥ 21॥
 
When you were a child, one day you saw the rising sun in a huge forest and thought that it was a fruit; so you suddenly jumped into the sky to pick it up.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)