श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.66.20 
एवमुक्ता ततस्तुष्टा जननी ते महाकपे।
गुहायां त्वां महाबाहो प्रजज्ञे प्लवगर्षभ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
महाकापे! वायुदेव के ऐसा कहने पर तुम्हारी माता प्रसन्न हो गयी। महाबाहो! वानरों में श्रेष्ठ! तब उन्होंने एक गुफा में तुम्हें जन्म दिया।
 
‘Mahakape! Your mother became pleased when Vayudev said this. Mahabaho! Best of the monkeys! Then she gave birth to you in a cave.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)