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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.66.14 
तां बलादायतश्रोणीं तनुमध्यां यशस्विनीम्।
दृष्ट्वैव शुभसर्वाङ्गीं पवन: काममोहित:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'उसके कूल्हे ऊँचे और चौड़े थे। कमर बहुत पतली थी। उसके शरीर के सभी अंग अत्यंत सुंदर थे। इस प्रकार यशस्विनी अंजना के अंगों को बलपूर्वक देखकर वायुदेव काम-मोहित हो गए।
 
‘Her hips were high and wide. The waist was very thin. All her body parts were extremely beautiful. In this way, after forcefully observing the body parts of Yashaswini Anjana, the wind god became fascinated with lust.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)