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ramayan 4.66.13: फिर उसने उसकी गोल-गोल जांघें, एक-दूसरे से सटे हुए दृढ़ स्तन और उसका सुन्दर मुख देखा ॥13॥   |   ramayan सर्ग 4.66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.66.13 
स ददर्श ततस्तस्या वृत्तावूरू सुसंहतौ।
स्तनौ च पीनौ सहितौ सुजातं चारु चाननम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने उसकी गोल-गोल जांघें, एक-दूसरे से सटे हुए दृढ़ स्तन और उसका सुन्दर मुख देखा ॥13॥
 
‘Then he saw her rounded thighs, her firm breasts touching each other and her beautiful face.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)