vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 66: जाम्बवान् का हनुमानजी को उनकी उत्पत्ति कथा सुनाकर समुद्रलङ्घन के लिये उत्साहित करना
»
श्लोक 1
श्लोक
4.66.1
अनेकशतसाहस्रीं विषण्णां हरिवाहिनीम्।
जाम्बवान् समुदीक्ष्यैवं हनूमन्तमथाब्रवीत्॥ १॥
अनुवाद
लाखों वानरों की सेना को इस प्रकार दुःखी होकर पड़ी हुई देखकर जाम्बवान् ने हनुमान् जी से कहा-॥1॥
Seeing the army of lakhs of monkeys lying in sadness like this, Jambavan said to Hanuman ji -॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×