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ramayan 4.65.2: गज, गवाक्ष, गवय, शरभ, गंधमादन, मैन्द, द्विविद, सुषेण और जाम्बवान- इन सभी ने अपनी-अपनी शक्तियों का वर्णन किया। 2॥   |   ramayan सर्ग 4.65: जाम्बवान् और अङ्गद की बातचीत तथा जाम्बवान् का हनुमान्जी को प्रेरित करने के लिये उनके पास जाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 65: जाम्बवान् और अङ्गद की बातचीत तथा जाम्बवान् का हनुमान्जी को प्रेरित करने के लिये उनके पास जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.65.2 
गजो गवाक्षो गवय: शरभो गन्धमादन:।
मैन्दश्च द्विविदश्चैव सुषेणो जाम्बवांस्तथा॥ २॥
 
 
अनुवाद
गज, गवाक्ष, गवय, शरभ, गंधमादन, मैन्द, द्विविद, सुषेण और जाम्बवान- इन सभी ने अपनी-अपनी शक्तियों का वर्णन किया। 2॥
 
Gaja, Gavaksha, Gavaya, Sharabha, Gandhamadana, Mainda, Dwivid, Sushen and Jambavan – all of them described their respective powers. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)