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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
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सर्ग 64: समुद्र की विशालता देखकर विषाद में पड़े हुए वानरों को आश्वासन दे अङ्गद का उनसे पृथक्-पृथक् समुद्र-लङ्घन के लिये उनकी शक्ति पूछना
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श्लोक 7
श्लोक
4.64.7
आकाशमिव दुष्पारं सागरं प्रेक्ष्य वानरा:।
विषेदु: सहिता: सर्वे कथं कार्यमिति ब्रुवन्॥ ७॥
अनुवाद
आकाश के समान विशाल उस समुद्र को देखकर सभी बंदर एक साथ बैठ गए और सोचने लगे, 'अब हम क्या करें?'
Having looked at the ocean which was as vast as the sky, all the monkeys sat together and began to think, 'What should we do now?'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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