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ramayan 4.63.9-10h: अपने शरीर को नए-नए लाल पंखों से सुशोभित देखकर सम्पाती को अपार हर्ष हुआ और वे वानरों से इस प्रकार बोले -॥9 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.63: सम्पाति का पंखयुक्त होकर वानरों को उत्साहित करके उड़ जाना और वानरों का वहाँ से दक्षिण दिशा की ओर प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 63: सम्पाति का पंखयुक्त होकर वानरों को उत्साहित करके उड़ जाना और वानरों का वहाँ से दक्षिण दिशा की ओर प्रस्थान करना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  4.63.9-10h 
स दृष्ट्वा स्वां तनुं पक्षैरुद‍्गतैररुणच्छदै:॥ ९॥
प्रहर्षमतुलं लेभे वानरांश्चेदमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
अपने शरीर को नए-नए लाल पंखों से सुशोभित देखकर सम्पाती को अपार हर्ष हुआ और वे वानरों से इस प्रकार बोले -॥9 1/2॥
 
Seeing his body adorned with newly grown red feathers, Sampati felt immense joy. He spoke to the monkeys thus -॥9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)