Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.63.5-6h: कई बार मेरे मन में प्राण त्यागने की इच्छा हुई है, परन्तु ऋषि के वचनों का स्मरण करके मैंने उस संकल्प को टाल दिया है। प्राण त्यागने के लिए उन्होंने जो उपदेश दिया था, वह मेरे दुःख को उसी प्रकार दूर कर देता है, जैसे प्रज्वलित ज्योति अंधकार को दूर कर देती है। | ramayan सर्ग 4.63: सम्पाति का पंखयुक्त होकर वानरों को उत्साहित करके उड़ जाना और वानरों का वहाँ से दक्षिण दिशा की ओर प्रस्थान करना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कई बार मेरे मन में प्राण त्यागने की इच्छा हुई है, परन्तु ऋषि के वचनों का स्मरण करके मैंने उस संकल्प को टाल दिया है। प्राण त्यागने के लिए उन्होंने जो उपदेश दिया था, वह मेरे दुःख को उसी प्रकार दूर कर देता है, जैसे प्रज्वलित ज्योति अंधकार को दूर कर देती है।
‘Many times I have had the desire to give up my life, but remembering the sage's words I have put off that resolution. The advice he gave me to keep my life dispels my sorrow like a burning flame dispels darkness.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥