श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 61: सम्पाति का निशाकर मुनि को अपने पंख के जलने का कारण बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.61.14 
जटायुर्मामनापृच्छॺ निपपात महीं तत:।
तं दृष्ट्वा तूर्णमाकाशादात्मानं मुक्तवानहम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जटायु मुझसे पूछे बिना ही पृथ्वी पर उतर आया। उसे नीचे जाते देख मैं भी तुरन्त आकाश से नीचे उतर आया॥14॥
 
Jatayu descended to the earth without asking me. Seeing him go down, I too immediately dropped myself down from the sky.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)