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ramayan 4.60.9: वे धर्मज्ञ ऋषि निशाकर अब स्वर्ग को चले गए हैं। मैंने उन महामुनि के बिना इस पर्वत पर रहते हुए आठ हजार वर्ष व्यतीत कर दिए हैं॥9॥   |   ramayan सर्ग 4.60: सम्पाति की आत्मकथा   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.60.9 
अष्टौ वर्षसहस्राणि तेनास्मिन्नृषिणा गिरौ।
वसतो मम धर्मज्ञे स्वर्गते तु निशाकरे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वे धर्मज्ञ ऋषि निशाकर अब स्वर्ग को चले गए हैं। मैंने उन महामुनि के बिना इस पर्वत पर रहते हुए आठ हजार वर्ष व्यतीत कर दिए हैं॥9॥
 
That religious sage Nishakar has now gone to heaven. I have spent eight thousand years living on this mountain without that great sage.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)