श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 60: सम्पाति की आत्मकथा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.60.3 
कृत्वा नि:शब्दमेकाग्रा: शृण्वन्तु हरयो मम।
तथ्यं संकीर्तयिष्यामि यथा जानामि मैथिलीम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे मिथिलेशकुमारी, सभी वानर एकाग्रचित्त होकर मेरी बात ध्यानपूर्वक सुनो। मैं तुम्हें यथार्थ रूप से सम्पूर्ण कथा सुनाता हूँ।॥3॥
 
‘All monkeys listen to me with concentration and silence. I am telling you the whole story as accurately as I know Mithilesh Kumari.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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