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ramayan 4.60.13: उस पवित्र आश्रम में पहुँचकर मैं एक वृक्ष के नीचे रुक गया और भगवान निशाकर के दर्शन की इच्छा से उनके आगमन की प्रतीक्षा करने लगा॥13॥   |   ramayan सर्ग 4.60: सम्पाति की आत्मकथा   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.60.13 
उपेत्य चाश्रमं पुण्यं वृक्षमूलमुपाश्रित:।
द्रष्टुकाम: प्रतीक्षे च भगवन्तं निशाकरम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उस पवित्र आश्रम में पहुँचकर मैं एक वृक्ष के नीचे रुक गया और भगवान निशाकर के दर्शन की इच्छा से उनके आगमन की प्रतीक्षा करने लगा॥13॥
 
On reaching that sacred hermitage, I halted under a tree and, desirous of seeing Lord Nishakar, began to wait for his arrival.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)