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श्लोक 4.60.12  |
तस्याश्रमपदाभ्याशे ववुर्वाता: सुगन्धिन:।
वृक्षो नापुष्पित: कश्चिदफलो वा न दृश्यते॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| उनके आश्रम के पास सदैव सुगन्धित वायु बहती रहती थी, वहाँ कोई भी वृक्ष बिना फल या फूल के नहीं दिखाई देता था॥12॥ |
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| ‘A fragrant breeze always blew near his hermitage. No tree there was seen without fruit or flowers.॥ 12॥ |
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