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श्लोक 4.59.3  |
क्व सीता केन वा दृष्टा को वा हरति मैथिलीम्।
तदाख्यातु भवान् सर्वं गतिर्भव वनौकसाम्॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| हे पक्षीराज! सीता कहाँ हैं? उन्हें किसने देखा है? और मिथिला की राजकुमारी का अपहरण किसने किया है? ये सब बातें हमें बताओ और हम सब वनवासी वानरों के लिए आश्रय बनो॥ 3॥ |
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| King of birds! Where is Sita? Who has seen her? And who has kidnapped the princess of Mithila? Tell us all these things and become a shelter for all of us forest dwelling monkeys.॥ 3॥ |
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