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श्लोक 4.59.28  |
तदलं कालसङ्गेन क्रियतां बुद्धिनिश्चय:।
नहि कर्मसु सज्जन्ते बुद्धिमन्तो भवद्विधा:॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| अतः अब और समय नष्ट करने की आवश्यकता नहीं है। अपनी बुद्धि से दृढ़ निश्चय करके सीता के दर्शन का प्रयत्न करो; क्योंकि तुम्हारे समान बुद्धिमान पुरुष अपने कार्य को पूरा करने में विलम्ब नहीं करते।॥28॥ |
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| ‘Therefore, there is no need to waste any more time. Make a firm resolve with your intellect and make efforts to see Sita; because intelligent people like you do not delay in accomplishing their tasks.'॥ 28॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे एकोनषष्टितम: सर्ग:॥ ५९॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें उनसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ५९॥ |
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