Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.59.18: उन महर्षि ने मुझसे कहा - 'यह सौभाग्य है कि सीता जीवित हैं। आपके देखते-देखते भी वह पुरुष जो उस स्त्री के साथ था, किसी प्रकार सुरक्षित निकल आया; अतः आप अवश्य सफल हों।'॥18॥   |   ramayan सर्ग 4.59: सम्पाति का अपने पुत्र सुपार्श्व के मुख से सुनी हुई सीता और रावण को देखने की घटना का वृत्तान्त बताना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 59: सम्पाति का अपने पुत्र सुपार्श्व के मुख से सुनी हुई सीता और रावण को देखने की घटना का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.59.18 
दिष्टॺा जीवति सीतेति ह्यब्रुवन् मां महर्षय:।
कथंचित् सकलत्रोऽसौ गतस्ते स्वस्त्यसंशयम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उन महर्षि ने मुझसे कहा - 'यह सौभाग्य है कि सीता जीवित हैं। आपके देखते-देखते भी वह पुरुष जो उस स्त्री के साथ था, किसी प्रकार सुरक्षित निकल आया; अतः आप अवश्य सफल हों।'॥18॥
 
‘That great sage said to me, ‘It is fortunate that Sita is alive. Even after falling in your sight, the man who had accompanied the woman somehow managed to escape safely; therefore may you certainly prosper.’॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)