Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.59.17: फिर वे बड़े वेग से चले गए, मानो अपने तेज से आकाश को आच्छादित कर रहे हों। उनके चले जाने पर सिद्ध और चारण आदि आकाश में विचरण करने वाले प्राणियों ने आकर मेरा बड़ा आदर-सत्कार किया। | ramayan सर्ग 4.59: सम्पाति का अपने पुत्र सुपार्श्व के मुख से सुनी हुई सीता और रावण को देखने की घटना का वृत्तान्त बताना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स यातस्तेजसा व्योम संक्षिपन्निव वेगित:।
अथाहं खेचरैर्भूतैरभिगम्य सभाजित:॥ १७॥
अनुवाद
फिर वे बड़े वेग से चले गए, मानो अपने तेज से आकाश को आच्छादित कर रहे हों। उनके चले जाने पर सिद्ध और चारण आदि आकाश में विचरण करने वाले प्राणियों ने आकर मेरा बड़ा आदर-सत्कार किया।
‘Then he went away with great speed, as if he was covering the sky with his brilliance. After his departure, the creatures who roamed the skies like Siddha and Charan etc. came and honoured me greatly.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥