Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.58.8: उस समय जब जटायु के भाई सम्पाती ने ऐसा कहा, तब परम बुद्धिमान राजकुमार अंगद ने उनसे इस प्रकार कहा -   |   ramayan सर्ग 4.58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.58.8 
जटायुषस्त्वेवमुक्तो भ्रात्रा सम्पातिना तदा।
युवराजो महाप्रज्ञ: प्रत्युवाचाङ्गदस्तदा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उस समय जब जटायु के भाई सम्पाती ने ऐसा कहा, तब परम बुद्धिमान राजकुमार अंगद ने उनसे इस प्रकार कहा -
 
When Jatayu's brother Sampati said this at that time, the most intelligent Prince Angad said to him thus -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)