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ramayan 4.58.6: अपने भाई को सूर्य की किरणों से पीड़ित और अत्यंत व्यथित देखकर मैंने स्नेहवश उसे अपने दोनों पंखों से ढक लिया।   |   ramayan सर्ग 4.58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.58.6 
तमहं भ्रातरं दृष्ट्वा सूर्यरश्मिभिरर्दितम्।
पक्षाभ्यां छादयामास स्नेहात् परमविह्वलम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अपने भाई को सूर्य की किरणों से पीड़ित और अत्यंत व्यथित देखकर मैंने स्नेहवश उसे अपने दोनों पंखों से ढक लिया।
 
Seeing my brother suffering from the rays of the sun and extremely distressed, out of affection I covered him with both my wings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)