Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.58.35: अब मैं आपकी सहायता से समुद्रतट पर जाना चाहता हूँ। वहाँ अपने मृत भाई महात्मा जटायु को जल अर्पित करूँगा।॥35॥   |   ramayan सर्ग 4.58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  4.58.35 
समुद्रं नेतुमिच्छामि भवद्भिर्वरुणालयम्।
प्रदास्याम्युदकं भ्रातु: स्वर्गतस्य महात्मन:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अब मैं आपकी सहायता से समुद्रतट पर जाना चाहता हूँ। वहाँ अपने मृत भाई महात्मा जटायु को जल अर्पित करूँगा।॥35॥
 
‘Now with your help I want to go to the seashore. There I will offer water to my deceased brother Mahatma Jatayu.'॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)