Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.58.26: 'मैं ज्ञानचक्षु से निश्चय ही देखता हूँ। तुम सब सीता का दर्शन करके लौट जाओगे। आकाश का पहला मार्ग गौरेयों और कबूतर आदि अन्नभक्षी पक्षियों के लिए है।॥26॥ | ramayan सर्ग 4.58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'मैं ज्ञानचक्षु से निश्चय ही देखता हूँ। तुम सब सीता का दर्शन करके लौट जाओगे। आकाश का पहला मार्ग गौरेयों और कबूतर आदि अन्नभक्षी पक्षियों के लिए है।॥26॥
‘Certainly I see with the eye of knowledge. You all will return after seeing Sita. The first path of the sky is for sparrows and food eating birds like pigeons.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥