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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
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सर्ग 58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना
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श्लोक 20
श्लोक
4.58.20
इतो द्वीपे समुद्रस्य सम्पूर्णे शतयोजने।
तस्मिँल्लङ्का पुरी रम्या निर्मिता विश्वकर्मणा॥ २०॥
अनुवाद
‘यहाँ से पूरे चार सौ कोस की दूरी पर समुद्र में एक द्वीप है, जहाँ विश्वकर्मा ने अत्यन्त सुन्दर लंकापुरी का निर्माण किया है।
‘There is an island in the sea at a distance of full four hundred Kos from here, where Vishwakarma has built the very beautiful Lankapuri.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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