Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.58.14: यद्यपि बुढ़ापे ने मेरी कान्ति छीन ली है और मेरी जीवनीशक्ति क्षीण हो गई है, फिर भी मुझे पहले श्री रामचन्द्रजी का यह कार्य पूरा करना है॥ 14॥   |   ramayan सर्ग 4.58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.58.14 
रामस्य यदिदं कार्यं कर्तव्यं प्रथमं मया।
जरया च हृतं तेज: प्राणाश्च शिथिला मम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि बुढ़ापे ने मेरी कान्ति छीन ली है और मेरी जीवनीशक्ति क्षीण हो गई है, फिर भी मुझे पहले श्री रामचन्द्रजी का यह कार्य पूरा करना है॥ 14॥
 
Although old age has taken away my radiance and my life-force has weakened, yet I have to accomplish this task of Sri Ramachandraji first.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)