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ramayan 4.58.11: तब जटायु के बड़े भाई, अत्यन्त शक्तिशाली सम्पाती ने उनकी इच्छानुसार बोलकर वानरों का आनन्द बढ़ा दिया।   |   ramayan सर्ग 4.58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.58.11 
ततोऽब्रवीन्महातेजा भ्राता ज्येष्ठो जटायुष:।
आत्मानुरूपं वचनं वानरान् सम्प्रहर्षयन्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तब जटायु के बड़े भाई, अत्यन्त शक्तिशाली सम्पाती ने उनकी इच्छानुसार बोलकर वानरों का आनन्द बढ़ा दिया।
 
Then Jatayu's elder brother, the very powerful Sampati, increased the joy of the monkeys by speaking as per his wish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)