vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना
»
श्लोक 10
श्लोक
4.58.10
अदीर्घदर्शिनं तं वै रावणं राक्षसाधमम्।
अन्तिके यदि वा दूरे यदि जानासि शंस न:॥ १०॥
अनुवाद
वह अदूरदर्शी दुष्ट राक्षस रावण यहां से दूर है या निकट, यदि आपको पता है तो कृपया हमें उसका पता बताइये।'
Whether that short-sighted evil demon Ravana is near or far from here, if you know then please tell us his whereabouts.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×