Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.58.1: जीवन की आशा छोड़ चुके वानरों के मुख से यह करुण वचन सुनकर सम्पाती की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने ऊँचे स्वर में कहा -॥1॥ | ramayan सर्ग 4.58: सम्पाति का अपने पंख जलने की कथा सुनाना, सीता और रावण का पता बताना तथा वानरों की सहायता से समुद्र-तट पर जाकर भाई को जलाञ्जलि देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जीवन की आशा छोड़ चुके वानरों के मुख से यह करुण वचन सुनकर सम्पाती की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने ऊँचे स्वर में कहा -॥1॥
Hearing this pitiful statement from the mouth of the monkeys who had given up hope of life, tears welled up in Sampati's eyes. He replied in a loud voice -॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥