श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 57: अङ्गद का सम्पाति को जटायु के मारे जाने का वृत्तान्त बताना तथा राम-सुग्रीव की मित्रता एवं वालिवध का प्रसंग सुनाकर अपने आमरण उपवास का कारण निवेदन करना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  4.57.5-6 
बभूवर्क्षरजो नाम वानरेन्द्र: प्रतापवान्।
ममार्य: पार्थिव: पक्षिन् धार्मिकौ तस्य चात्मजौ॥ ५॥
सुग्रीवश्चैव वाली च पुत्रौ घनबलावुभौ।
लोके विश्रुतकर्माभूद् राजा वाली पिता मम॥ ६॥
 
 
अनुवाद
पक्षीराज! पहले एक पराक्रमी वानरराज थे जिनका नाम ऋषराज था! राजा ऋषराज मेरे दादा थे। उनके दो महापराक्रमी पुत्र थे - सुग्रीव और वालि। दोनों ही अत्यंत पराक्रमी थे। उनमें से राजा वालि मेरे पिता थे। वे अपने पराक्रम के कारण जगत में बहुत प्रसिद्ध थे। 5-6।
 
‘King of birds! Earlier there was a mighty monkey king whose name was Rishraja! King Rishraja was my grandfather. He had two virtuous sons- Sugreeva and Vaali. Both were very strong. Out of them King Vaali was my father. He was very famous in the world due to his valour. 5-6.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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