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ramayan 4.57.2: उन वानरों ने, जो आमरण उपवास कर रहे थे, गिद्ध को देखकर यह भयानक बात सोची, ‘क्या यह गिद्ध हम सबको खा जाएगा?’ 2.   |   ramayan सर्ग 4.57: अङ्गद का सम्पाति को जटायु के मारे जाने का वृत्तान्त बताना तथा राम-सुग्रीव की मित्रता एवं वालिवध का प्रसंग सुनाकर अपने आमरण उपवास का कारण निवेदन करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 57: अङ्गद का सम्पाति को जटायु के मारे जाने का वृत्तान्त बताना तथा राम-सुग्रीव की मित्रता एवं वालिवध का प्रसंग सुनाकर अपने आमरण उपवास का कारण निवेदन करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.57.2 
ते प्रायमुपविष्टास्तु दृष्ट्वा गृध्रं प्लवंगमा:।
चक्रुर्बुद्धिं तदा रौद्रां सर्वान् नो भक्षयिष्यति॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन वानरों ने, जो आमरण उपवास कर रहे थे, गिद्ध को देखकर यह भयानक बात सोची, ‘क्या यह गिद्ध हम सबको खा जाएगा?’ 2.
 
Those monkeys, who were fasting till death, saw the vulture and thought this fearful thing, 'Will this vulture eat us all?' 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)