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श्लोक 4.57.18  |
ते वयं कपिराजस्य सर्वे वचनकारिण:।
कृतां संस्थामतिक्रान्ता भयात् प्रायमुपासिता:॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| हम सब वानरराज सुग्रीव के आज्ञाकारी हैं, परन्तु हमने उनके द्वारा निर्धारित समय को पार कर लिया है। अतः उनके भय से हम यहाँ मृत्युपर्यन्त व्रत कर रहे हैं॥18॥ |
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| We are all obedient to the King of Monkeys Sugreeva, but we have exceeded the time limit fixed by him. Hence, out of fear of him, we are observing a fast till death here.॥ 18॥ |
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