Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.57.16: ‘मन को एकाग्र करके दण्डकारण्य में भली-भाँति खोज करते हुए हम अनजाने में ही पृथ्वी के एक खुले हुए छिद्र में प्रवेश कर गए।॥16॥   |   ramayan सर्ग 4.57: अङ्गद का सम्पाति को जटायु के मारे जाने का वृत्तान्त बताना तथा राम-सुग्रीव की मित्रता एवं वालिवध का प्रसंग सुनाकर अपने आमरण उपवास का कारण निवेदन करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 57: अङ्गद का सम्पाति को जटायु के मारे जाने का वृत्तान्त बताना तथा राम-सुग्रीव की मित्रता एवं वालिवध का प्रसंग सुनाकर अपने आमरण उपवास का कारण निवेदन करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.57.16 
ते वयं दण्डकारण्यं विचित्य सुसमाहिता:।
अज्ञानात् तु प्रविष्टा: स्म धरण्या विवृतं बिलम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘मन को एकाग्र करके दण्डकारण्य में भली-भाँति खोज करते हुए हम अनजाने में ही पृथ्वी के एक खुले हुए छिद्र में प्रवेश कर गए।॥16॥
 
‘While concentrating our minds and searching thoroughly in Dandakaranya, we unknowingly entered an open hole in the earth.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)