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ramayan 4.57.11: इस प्रकार महाबली रावण ने जटायु को मार डाला। भगवान राम ने स्वयं उसका अंतिम संस्कार किया और वह उत्तम गति (साकेत धाम) को प्राप्त हुआ।॥11॥   |   ramayan सर्ग 4.57: अङ्गद का सम्पाति को जटायु के मारे जाने का वृत्तान्त बताना तथा राम-सुग्रीव की मित्रता एवं वालिवध का प्रसंग सुनाकर अपने आमरण उपवास का कारण निवेदन करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 57: अङ्गद का सम्पाति को जटायु के मारे जाने का वृत्तान्त बताना तथा राम-सुग्रीव की मित्रता एवं वालिवध का प्रसंग सुनाकर अपने आमरण उपवास का कारण निवेदन करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.57.11 
एवं गृध्रो हतस्तेन रावणेन बलीयसा।
संस्कृतश्चापि रामेण जगाम गतिमुत्तमाम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार महाबली रावण ने जटायु को मार डाला। भगवान राम ने स्वयं उसका अंतिम संस्कार किया और वह उत्तम गति (साकेत धाम) को प्राप्त हुआ।॥11॥
 
‘In this way Jatayu was killed by the mighty Ravana. Lord Rama himself performed his last rites and he attained the best state (Saket Dham).॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)