Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.57.1: दुःख के कारण सम्पाती का स्वर विकृत हो गया। उसकी बात सुनकर भी वानर योद्धाओं को उस पर विश्वास नहीं हुआ, क्योंकि उन्हें उसके कार्यों पर संदेह था। | ramayan सर्ग 4.57: अङ्गद का सम्पाति को जटायु के मारे जाने का वृत्तान्त बताना तथा राम-सुग्रीव की मित्रता एवं वालिवध का प्रसंग सुनाकर अपने आमरण उपवास का कारण निवेदन करना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दुःख के कारण सम्पाती का स्वर विकृत हो गया। उसकी बात सुनकर भी वानर योद्धाओं को उस पर विश्वास नहीं हुआ, क्योंकि उन्हें उसके कार्यों पर संदेह था।
Sampati's voice was distorted due to grief. Even after hearing what he said, the monkey warriors did not believe him because they were suspicious of his actions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥