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ramayan 4.54.7: जब सभी वानर बाहर चले गए, तो उन्होंने चौथे दंड के साथ-साथ विभिन्न भयंकर शब्दों से अंगद को डराना शुरू कर दिया।   |   ramayan सर्ग 4.54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.54.7 
तेषु सर्वेषु भिन्नेषु ततोऽभीषयदङ्गदम्।
भीषणैर्विविधैर्वाक्यै: कोपोपायसमन्वितै:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जब सभी वानर बाहर चले गए, तो उन्होंने चौथे दंड के साथ-साथ विभिन्न भयंकर शब्दों से अंगद को डराना शुरू कर दिया।
 
When all the monkeys were out, they began to frighten Angada with various fearful words combined with the fourth means of punishment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)