श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.54.6 
स चतुर्णामुपायानां तृतीयमुपवर्णयन्।
भेदयामास तान् सर्वान् वानरान् वाक्यसम्पदा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
साम, दाम, भेद और दण्ड - इन चार उपायों में से तीसरे उपाय का वर्णन करके, उन्होंने युक्तिपूर्वक वचनों द्वारा उन समस्त वानरों का नाश करना आरम्भ किया। ॥6॥
 
Describing the third of the four methods of Sama (conciliation), Daam (payment), Bhed (distribution) and Danda (punishment), He began to destroy all those monkeys by means of His logical words. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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