Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.54.21: ‘तुम्हारे चाचा सुग्रीव धर्म के मार्ग पर चलने वाले राजा हैं। वे सदैव तुम्हारे सुख के इच्छुक, दृढ़निश्चयी, धर्मपरायण और सत्यनिष्ठ हैं। इसलिए वे तुम्हें कभी नष्ट नहीं कर सकते।’ 21॥   |   ramayan सर्ग 4.54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.54.21 
धर्मराज: पितृव्यस्ते प्रीतिकामो दृढव्रत:।
शुचि: सत्यप्रतिज्ञश्च स त्वां जातु न नाशयेत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारे चाचा सुग्रीव धर्म के मार्ग पर चलने वाले राजा हैं। वे सदैव तुम्हारे सुख के इच्छुक, दृढ़निश्चयी, धर्मपरायण और सत्यनिष्ठ हैं। इसलिए वे तुम्हें कभी नष्ट नहीं कर सकते।’ 21॥
 
‘Your uncle Sugriva is a king who follows the path of religion. They are always desirous of your happiness, steadfast, pious and true-committing. Therefore can never destroy you. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)