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ramayan 4.54.2: हनुमान जी यह भली-भाँति जानते थे कि वालिकुमार अंगद आठ प्रकार की बुद्धि, चार प्रकार के बल और चौदह प्रकार के गुणों से संपन्न हैं॥2॥   |   ramayan सर्ग 4.54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.54.2 
बुद‍्ध्या ह्यष्टाङ्गया युक्तं चतुर्बलसमन्वितम्।
चतुर्दशगुणं मेने हनूमान् वालिन: सुतम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हनुमान जी यह भली-भाँति जानते थे कि वालिकुमार अंगद आठ प्रकार की बुद्धि, चार प्रकार के बल और चौदह प्रकार के गुणों से संपन्न हैं॥2॥
 
Hanuman ji knew very well that Valikumar Angad was blessed with eight 1-type intelligence, four 2-type strength and fourteen 3-type virtues. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)