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ramayan 4.54.16: हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले वीर! जैसे ही आप इस गुफा में निवास करने लगेंगे, ये सभी वानर आपको त्याग देंगे; क्योंकि उन्होंने ऐसा करने का निश्चय कर लिया है॥16॥   |   ramayan सर्ग 4.54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.54.16 
अवस्थानं यदैव त्वमासिष्यसि परंतप।
तदैव हरय: सर्वे त्यक्ष्यन्ति कृतनिश्चया:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले वीर! जैसे ही आप इस गुफा में निवास करने लगेंगे, ये सभी वानर आपको त्याग देंगे; क्योंकि उन्होंने ऐसा करने का निश्चय कर लिया है॥16॥
 
O brave one who torments the enemies! As soon as you start living in this cave, all these monkeys will abandon you; because they have decided to do so.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)