Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.54.15: लक्ष्मण के पास ऐसे अनेक बाण हैं, जिनका स्पर्श मात्र भी वज्र और भस्म के समान पीड़ादायक है। वे बाण पर्वतों को भी भेद सकते हैं॥15॥ | ramayan सर्ग 4.54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लक्ष्मणस्य च नाराचा बहव: सन्ति तद्विधा:।
वज्राशनिसमस्पर्शा गिरीणामपि दारका:॥ १५॥
अनुवाद
लक्ष्मण के पास ऐसे अनेक बाण हैं, जिनका स्पर्श मात्र भी वज्र और भस्म के समान पीड़ादायक है। वे बाण पर्वतों को भी भेद सकते हैं॥15॥
‘Lakshmana has many such arrows, whose slightest touch is as painful as thunderbolts and ashen arrows. Those arrows can pierce even the mountains.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥