श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.54.14 
स्वल्पं हि कृतमिन्द्रेण क्षिपता ह्यशनिं पुरा।
लक्ष्मणो निशितैर्बाणैर्भिन्द्यात् पत्रपुटं यथा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में इन्द्र ने इस गुफा को अपने वज्र से थोड़ा-सा भी नुकसान नहीं पहुँचाया था; किन्तु लक्ष्मण अपने पत्तों के समान तीखे बाणों से इसे छेद डालेंगे॥ 14॥
 
In the past Indra did little damage to this cave by striking it with his thunderbolt; but Lakshmana will pierce it with his sharp arrows like a leaf plate.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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