श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.54.13 
यां चेमां मन्यसे धात्रीमेतद् बिलमिति श्रुतम्।
एतल्लक्ष्मणबाणानामीषत् कार्यं विदारणम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तुम यह मानने लगे हो कि यह गुफा हमें माता की भाँति अपनी गोद में छिपा लेगी और इस प्रकार हमारी रक्षा करेगी। तारा से तुमने इस गुफा की अभेद्यता के विषय में जो कुछ सुना है, वह सब व्यर्थ है; क्योंकि इस गुफा को भेदना लक्ष्मण के बाणों के लिए बच्चों का खेल है।
 
You have started to believe that this cave will hide us in its lap like a mother and hence we will be protected. What you have heard from Tara about the impenetrability of this cave is all futile; because piercing this cave is a child's play for Lakshman's arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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