Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.54.10-11: मैं तुमसे कहता हूँ, इनमें से कोई भी वानर सुग्रीव का विरोध करके तुम्हारी ओर आकर्षित नहीं हो सकता। जैसे जाम्बवान, नील और महाकपि सुहोत्र हैं, वैसे ही मैं भी हूँ। मुझे और इन सभी लोगों को साम, दान आदि से सुग्रीव से अलग नहीं किया जा सकता। तुम्हारे लिए भी दण्ड द्वारा हमें वानरराज से अलग करना संभव नहीं है (अतः सुग्रीव तुमसे अधिक शक्तिशाली है)। | ramayan सर्ग 4.54: हनुमान जी का भेदनीति के द्वारा वानरों को अपने पक्ष में करके अङ्गद को अपने साथ चलने के लिये समझाना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं तुमसे कहता हूँ, इनमें से कोई भी वानर सुग्रीव का विरोध करके तुम्हारी ओर आकर्षित नहीं हो सकता। जैसे जाम्बवान, नील और महाकपि सुहोत्र हैं, वैसे ही मैं भी हूँ। मुझे और इन सभी लोगों को साम, दान आदि से सुग्रीव से अलग नहीं किया जा सकता। तुम्हारे लिए भी दण्ड द्वारा हमें वानरराज से अलग करना संभव नहीं है (अतः सुग्रीव तुमसे अधिक शक्तिशाली है)।
‘I tell you, none of these monkeys can oppose Sugreeva and be attracted towards you. Just like Jambavan, Neel and Mahakapi are Suhotra, I am also like that. I and all these people cannot be separated from Sugreeva by means of Sama, Daan etc. It is also not possible for you to separate us from the monkey king by punishment (hence Sugreeva is stronger than you).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥