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ramayan 4.53.2: मायासुर की माया से निर्मित पर्वत की दुर्गम गुफा में वानरों ने सीता की खोज में एक महीना बिताया, जो राजा सुग्रीव द्वारा उनके लौटने का निश्चित समय था॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 4.53: लौटने की अवधि बीत जाने पर भी कार्य सिद्ध न होने के कारण सुग्रीव के कठोर दण्ड से डरने वाले अङ्गद आदि वानरों का उपवास करके प्राण त्याग देने का निश्चय   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 53: लौटने की अवधि बीत जाने पर भी कार्य सिद्ध न होने के कारण सुग्रीव के कठोर दण्ड से डरने वाले अङ्गद आदि वानरों का उपवास करके प्राण त्याग देने का निश्चय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.53.2 
मयस्य मायाविहितं गिरिदुर्गं विचिन्वताम्।
तेषां मासो व्यतिक्रान्तो यो राज्ञा समय: कृत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
मायासुर की माया से निर्मित पर्वत की दुर्गम गुफा में वानरों ने सीता की खोज में एक महीना बिताया, जो राजा सुग्रीव द्वारा उनके लौटने का निश्चित समय था॥ 2॥
 
The monkeys spent one month searching for Sita in the inaccessible cave of the mountain created by Mayasura's magic, which was the time fixed by King Sugreeva for their return.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)