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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 52: तापसी स्वयंप्रभा के पूछने पर वानरों का उसे अपना वृत्तान्त बताना और उसके प्रभाव से गुफा के बाहर निकलकर समुद्रतट पर पहुँचना  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  4.52.21-22 
शरणं त्वां प्रपन्ना: स्म: सर्वे वै धर्मचारिणीम्॥ २१॥
य: कृत: समयोऽस्मासु सुग्रीवेण महात्मना।
स तु कालो व्यतिक्रान्तो बिले च परिवर्तताम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'देवी! आप धर्म-कर्म में तत्पर हैं। अतः हम सब आपकी शरण में आए हैं। महात्मा सुग्रीव ने हमारे लौटने का जो समय निश्चित किया था, वह इस गुफा में भ्रमण करते हुए व्यतीत हुआ।
 
‘Devi! You are engaged in religious practices. Hence we all have come to your refuge. The time fixed by Mahatma Sugreev for our return was spent in roaming around in this cave.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)