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ramayan 4.51.9-10h: हनुमानजी के ऐसा पूछने पर समस्त प्राणियों के कल्याण में सदैव तत्पर रहने वाले उस धर्मनिष्ठ तपस्वी ने उत्तर दिया - ॥9 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.51: हनुमान जी के पूछने पर वृद्धा तापसी का अपना तथा उस दिव्य स्थान का परिचय देकर सब वानरों को भोजन के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी के पूछने पर वृद्धा तापसी का अपना तथा उस दिव्य स्थान का परिचय देकर सब वानरों को भोजन के लिये कहना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  4.51.9-10h 
एवमुक्ता हनुमता तापसी धर्मचारिणी॥ ९॥
प्रत्युवाच हनूमन्तं सर्वभूतहिते रता।
 
 
अनुवाद
हनुमानजी के ऐसा पूछने पर समस्त प्राणियों के कल्याण में सदैव तत्पर रहने वाले उस धर्मनिष्ठ तपस्वी ने उत्तर दिया - ॥9 1/2॥
 
When Hanuman ji asked this, that devout ascetic who was always ready for the welfare of all living beings replied – ॥ 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)